सप्तपर्णी

अंग्रेजी नाम : Devil Tree
वानस्पतिक नाम : Alstonia scholaris

पुष्पन,फलनकाल : अक्टूम्बर से दिसम्बर
बीज संग्रहण:दिसम्बर से जनवरी माह

एलोस्टोनिया जिसे आमतौर पर हिंदी में सप्तपर्णी या छतवन कहा जाता है, ‘एपोसिनेसी’ (Apocynaceae) परिवार का एक सदाबहार उष्णकटिबंधीय वृक्ष है। यह पेड़ भारतीय उपमहाद्वीप, दक्षिण-पूर्वी एशिया और ऑस्ट्रेलिया का मूल निवासी है। इसकी पत्तियां आमतौर पर टहनी के अंत में 7 के गुच्छे (चक्र) में निकलती हैं, जिसके कारण इसे ‘सप्तपर्णी’ नाम दिया गया है। रोचक बात यह है कि यह पश्चिम बंगाल का
राजकीय वृक्ष भी है।
अन्य नाम और उनके पीछे की वजह इसकी लकड़ी काफी हल्की होती है, जिसका उपयोग पहले स्कूलों के बच्चों के लिए लकड़ी के स्लेट और ब्लैकबोर्ड बनाने में किया जाता था।
रात के समय इसके फूलों से एक बहुत ही तेज और मादक खुशबू आती है।

मुख्य विशेषताएं

ऊंचाई और बनावट: यह पेड़ 20 से 40 मीटर (या उससे अधिक) तक ऊंचा हो सकता है। इसकी शाखाएं चारों तरफ छाते की तरह फैली होती हैं।

फूल और सुगंधः शरद ऋतु
(अक्टूबर-दिसंबर) के दौरान इसमें छोटे, गुच्छेदार हरे-सफेद या पीले रंग के फूल खिलते हैं, जिनकी सुगंध शाम के समय बहुत तेज हो जाती है।

दूधिया लेटेक्सः इस पेड़ की पत्तियों या टहनियों को तोड़ने पर एक सफेद, गाढ़ा दूध जैसा लिक्विडसफेद, गाढ़ा दूध जैसा लिक्विड (Lateex) निकलता है, जिसमें जहरीले एल्कलॉइड होते हैं। इसी कारण जानवर या कीड़े-मकोड़े इसकी पत्तियों को नहीं खाते है।

औषधीय और अन्य उपयोग

पारंपरिक चिकित्साः आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इसकी छाल और पत्तियों का बहुत महत्व है। इसके कड़वे स्वाद वाले अर्क का उपयोग मलेरिया के इलाज में क्विनाइन के विकल्प के रूप में किया जाता है।
बीमारियों में लाभः यह त्वचा रोग, बुखार, दस्त (पेचिश), अस्थमा और घावों को तेजी से भरने में सहायक माना जाता है।

व्यावसायिक उपयोगः इसकी हल्की लकड़ी का उपयोग पैकिंग बॉक्स, हल्के फर्नीचर और कागज तैयार करने के लिए लुगदी बनाने में किया जाता है।

पर्यावरण और सावधानी

सप्तपर्णी का पेड़ प्रदूषण और सूखे को आसानी से झेल लेता है, इसलिए इसे शहरों में सड़कों के किनारे और पार्कों में छाया के लिए खूब लगाया जाता है।

हालांकि, जब इस पर फूल आते हैं, तो इसके अत्यधिक परागकणों (Pollen grains) और तेज गंध के कारण कुछ संवेदनशील लोगों को सांस की एलर्जी या अस्थमा की समस्या हो सकती है।

इसके जहरीले स्वभाव के कारण इसके औषधीय इस्तेमाल से पहले विशेषज्ञ या चिकित्सक की सलाह जरूरी है।

Leave a Comment