मांडू इमली ( गोरख इमली, खुरासानी इमली)

 

 

अग्रेजी नाम : Baobab, Monkey Bread Tree

वानस्पतिक नाम : Adansonia digitata

फूल एवं फल आने का समय : मई से जुलाई तक फुल एवं सितंबर में फल।

बीज संग्रहण : नवंबर से अप्रैल

उपयोग : ज्वर,उदर विकार, पित्त विकार, वामन तथा अतिसार में उपयोगी।

उपलब्धता – दुर्लभ एवं विलुप्त प्रजाति।

 

वास्तव में यह एक विशालकाय और दुर्लभ वृक्ष है यह पेड़ मुख्य रूप से मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर मांडू (मांडव) में पाया जाता है और अपने अनोखे आकार, विशाल तने तथा औषधीय गुणों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
अनोखी शारीरिक विशेषताएं

उल्टा पेड़ः यह देखने में ऐसा लगता है जैसे किसी ने इसे उल्टा लगा दिया हो, यानी इसकी जड़ें ऊपर और तना नीचे की ओर देखने पर प्रतीत होता है।

विशाल जल संचयः इसका तना बेहद मोटा और खोखला होता है, जो अपने जीवनकाल में करीब 1,20,000 लीटर तक पानी जमा कर सकता है।

लंबी उम्रः इन पेड़ों की उम्र बेहद लंबी होती है। ये 1,000 से लेकर 5,000 साल तक जीवित रह सकते हैं।

पतझड़ः वर्षा ऋतु को छोड़कर इस पेड़ पर साल के अधिकांश समय पत्तियां नहीं होती हैं।

फल और स्वाद

दिखावटः इसके फल बड़े, लौकेटनुमा या बोतल के आकार के होते हैं, जिनका बाहरी आवरण नारियल जैसा सख्त और अंदर का हिस्सा सफेद टॉफी जैसा सूखा गुदा होता है।

स्वादः इसका स्वाद हमारी पारंपरिक इमली जितना तेज नहीं, बल्कि हल्का खट्टा-मीठा और अनोखा होता हैं।
प्यास बुझाने वालाः इसके फल के

बारे में कहा जाता है कि इसे खाने के बाद 3-4 घंटे तक प्यास नहीं लगती, इसलिए पुराने समय में सैनिक इसे युद्ध के दौरान पानी की कमी से बचने के लिए साथ रखते थे।

स्वास्थ्य लाभ और औषधीय गुण

पोषक तत्वों से भरपूरः इसके फल और पत्तियां विटामिन-सी, कैल्शियम, पोटैशियम और फाइबर का बेहतरीन स्रोत हैं।

पेट और गर्मी में राहतः इसका शरबत पेट की बीमारियों को ठीक करता है और गर्मियों में शरीर को ठंडक देकर पानी की कमी (Dehydration) को रोकता है।

इतिहास और नामकरण

अफ्रीकी मूल   यह पेड़ मूल रूप से

अफ्रीका के शुष्क इलाकों का है, जिसे भारत लाया गया था।
नाम की कहानीः ईरान के ‘खुरसान’ क्षेत्र के सुल्तान द्वारा उपहार में दिए जाने के कारण इसे ‘खुरासानी इमली’ और नाथ संप्रदाय के गुरु गोरखनाथ से जुड़े होने के कारण इसे ‘गोरख चिंच’ या ‘गोरख इमली’ भी कहते हैं।

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